Gujarish

Gar sajda waakai hai dil au rooh ki paak awaaz, to uthaaiye paimaana aur kehiye "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Gar na lage ki is ibaadat gaah main khuda nahin, to ek sher ada kijiye aap bhi "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Tuesday, July 28, 2009

कशमकश

हमने चाहा, कि लाख़ चाहें, कि चाहें ना तुमको !
देखना, देखना, है क़ाबू में मेरे, , चाहना, चाहना तुमको !!


दीदारे--हुस्न तेरा इबादत है, हुस्न कि मल्लिका !
इबादत है कि तेरे हुस्न का दीदार बनी रहे धड़कन मेरे दिल का !!


छोड़ दिए तुम्हें छोड़ने के सारे ख़याल, जो छोड़ रखे थे हमने !
छोड़ सके तो वो ख़याल, जो, बिछुड़ने के ख़याल, से छोड़ रखे थे हमने !!


हमने आपसे बस इतनी सी गुज़ारिश की थी, कि हमें आपसे एक जरा सी गुज़ारिश करनी है !
हम आपसे ताउम्र गुज़ारिश कर सकें, कि हमें आपके साथ ऐसी एक साजिश करनी है !!


ज़ाम--ज़हर जरा ला साक़ी, कि साकि फ़िर कभी ज़ाम--ज़हर का दीदार कर सके !
सुन कि साक़ी, कि सुन दास्तान--साकि, फ़िर कभी कोई किसी पे ऐतेबार कर सके !!

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