Gujarish

Gar sajda waakai hai dil au rooh ki paak awaaz, to uthaaiye paimaana aur kehiye "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Gar na lage ki is ibaadat gaah main khuda nahin, to ek sher ada kijiye aap bhi "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Wednesday, July 29, 2009

फ़िर मिलने कि तारीख

शुक्रगुजार हूँ कि आपने तस्सली तो दी
बुझते हुए हममें कुछ खलबली तो दी

फ़िर आगे मिलने का वक्त मुक़म्मल तो हुआ
अगला ही सही, कोई जनम सफल तो हुआ

ख्वाबों के खजाने में एक अनूठा इज़ाफा हुआ है
लुट गई भले ये ज़िन्दगी पर अगले का तो मुनाफा हुआ है

पहली बार वक्त पूरी तरह से अपने काबू में हुआ पड़ा है
अगले जनम का जरिया ये खंजर मुठ्ठी में मुआ पड़ा है

अच्छा हुआ कि कह दिया कि तू मुझसे खफ़ा नहीं है
साकि कहता न था ! कि वो जो भी है बेवफ़ा नहीं है

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