Gujarish

Gar sajda waakai hai dil au rooh ki paak awaaz, to uthaaiye paimaana aur kehiye "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Gar na lage ki is ibaadat gaah main khuda nahin, to ek sher ada kijiye aap bhi "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Monday, August 3, 2009

गज़लों का ताजमहल

हाले-ए-दिल कुछ इतना गडबडा गया है
चट्टान सा जिगर कुछ ऐसा लड़खड़ा गया है
अपनों की कमी ही, बस एक सारी कमी है
और गज़लों से ही बस अपनी एक यारी जमी है

महफिल यारों से अब खाली पड़ी है
आंखों में नशे की बस लाली पड़ी है
पहले कुछ मसखरी थी जरा भूचाल था
अब बस गजलें हैं, और कव्वाली पड़ी है

लगी ज्यूँ भूख कि कोई दावत दे जाता है
तपती जलती धूप भी तरावट दे जाता है
तेरी यादों में लब्ज़ फूलों सा पिरोता जा रहा है
गज़लों का एक ताजमहल सा बनता जा रहा है

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