Gujarish

Gar sajda waakai hai dil au rooh ki paak awaaz, to uthaaiye paimaana aur kehiye "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Gar na lage ki is ibaadat gaah main khuda nahin, to ek sher ada kijiye aap bhi "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Friday, September 4, 2009

ना कुवांरा था, न कुवांरा हूँ

फ़िर मेरी शादी हो गई, और पालकी भी मेरी सज गई
छलकती आखों से देख खुदा ने कहा कि - ओ बन्नो

जा के तेरा तलाक हो इसीलिए ये निकाह हुआ है,
सौदा तू क्या करेगी कि सबका जनम पहले ही बिका हुआ है,

फ़िर ससुराल के ऐशो आराम में मस्त फूली-फूली
खुदा के अल्फाज को बस, यूँ ही, दो वक्त में भूली

फ़िर मेरी शादी हो गई, और डोली भी मेरी सज गई
छलकती आखों से देख अब्बू ने कहा कि - ओ बन्नो

जा कि ससुराल में पीहर की कुछ लाज रखना,
खुदाई रखना, इंसाफ रखना, दिल साफ़ रखना

पर अपना-पराया कुछ इस तरह हुआ भारी,
कि अपना छोड़ गैर-गैर लगे ये दुनिया सारी

फ़िर मेरी शादी हो गयी, और मेरी मैयत भी सज गयी
छलकती आखों से देख सबों ने कहा कि - ओ बन्नो

जा कि छोड़ माया मो़ह इस संसार की, यहाँ रखा क्या है?
यहाँ तो सब छलावा है , कब किसका यहाँ रहा क्या है?

एक
वही नाम है राम का, और राम ही हैं एक सच यहाँ,
ये शरीर तो बस कफ़न है, इसे दफ़न होना ही है एक सच यहाँ

1 comment:

  1. Nice post saaheb..... gud lines.... :)

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