Gujarish

Gar sajda waakai hai dil au rooh ki paak awaaz, to uthaaiye paimaana aur kehiye "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Gar na lage ki is ibaadat gaah main khuda nahin, to ek sher ada kijiye aap bhi "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Wednesday, October 7, 2009

कहानी क्या है

जरा इतना तो बताती जा की मैं क्या कहूँगा
जब लोग पूछेंगे की मेरी कहानी क्या है
चल लोगों का भी छोड़, रोज शीशे को क्या कहूँगा
इतना तो बता की आख़िर तेरी जुबानी क्या है

इश्क वो था जो पहली बार नज़रों का था
या बारिश की बूंदों से बचने और भींगने में था
हम कायल ज्यादा तुम्हारी आखों के थे
या कशिश ज्यादा तुम्हारे बदन के महकने में था

जान लेने में ही बस सबकुछ रखा है
बता! लोगों की कही सुनी कैसे मान लूँ
जान दे कर तो एहसासों का एहसास है
रूह-ऐ-रिहाई की शर्त है कि तेरा ख्याल जान लूँ

मनुष्य जीवन एक यात्रा है
और मनुष्य एक यात्री
मिल के तो देखो किसी मोड़ पे
ये याद-ऐ-सौगात होगी इतनी ही हरी

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