Gujarish

Gar sajda waakai hai dil au rooh ki paak awaaz, to uthaaiye paimaana aur kehiye "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Gar na lage ki is ibaadat gaah main khuda nahin, to ek sher ada kijiye aap bhi "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Sunday, August 15, 2010

Sabko bata do !!!

मशालों में राखों की केवल लपटें बची हैं,
सीने में हसरतों की केवल करवटें बची हैं,
सपनों की राह में अब जब कांटें चुभते हैं
"अँधेरा है, अँधेरा है" लोग क्यूँ चीखते हैं ?
चाँदनी तो है अभी? अंधेर नहीं हुई है अब तक,
भारत! कुछ करो; देर नहीं हुई है अब तक!

चूल्हों में दीमक के घरोंधे कच्चे हैं अभी भी, जला दो!
नफरत की आग जली है बस अभी अभी, बुझा दो!
भूखों के कफ़न में हरकत बची हैं अभी भी, हवा दो!
सरहद में लोहा लिए वो खड़े हैं अभी भी , दुआ दो!
अमन गया, आशा है! देर नहीं हुई है अब तक,
सबको बता दो! सबको बता दो! सबको बता दो!

1 comment:

  1. प्रशंसनीय.........लेखन के लिए बधाई।
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    देश को नेता लोग करते हैं प्यार बहुत?
    अथवा वे वाक़ई, हैं रंगे सियार बहुत?
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    होली मुबारक़ हो। सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

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