Gujarish

Gar sajda waakai hai dil au rooh ki paak awaaz, to uthaaiye paimaana aur kehiye "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Gar na lage ki is ibaadat gaah main khuda nahin, to ek sher ada kijiye aap bhi "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Thursday, August 4, 2011

खुशी

गुलाबों के आशियाने में,
खुशबू भी है और बहार भी!
भवरे कि गुंजन में,
प्यार भी है और खुमार भी!!
काटों की चुभन में दर्द नहीं, कर लो यकीं,
यही तो है मोहब्बत यारों! यही तो है खुशी!!!

मौसम सर्द हुई, हवा का रुख बदला,
किसी आक्रोश से वक़्त आँधियों में बदला,
बिजली चमकती जाती है कड़क कड़क कर,
बादल गरजते बरसते बस्ती उड़ा ले चला,
पर उस पेड़ का पंछी अपनी पलटन संभाले पड़ा है वहीँ का वहीँ,
यही तो ज़िन्दगी है यारों! यही तो है खुशी!!

आँखों की शोखी अब तक पथरा चुकी है,
जमाने ने जुल्मों सितम बरपा रखी है,
थक चुके हम हकीकत का बोझ ढोते,
रुक चुका लहू हमारे नसों पर का है,
कुचले, मसले जाने के बाद भी सांस तो है कहीं कहीं,
यही तो है बेखुदी यारों! यही तो है ख़ुशी!!

घटा में छुपके सितारे कभी फना नहीं होते,
बन्दे लाख कहर बरपा लें पर खुदा नहीं होते,
होती है मुश्किलें हजारों वफ़ा की राह में,
उठा लो दीवार ऊंची पर दीवाने कभी जुदा नहीं होते,
लड़ते हैं, मरते हैं, जीत भी होती है कभी कभी
यही तो इबादत है यारों! यही तो है खुशी!!

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