Gujarish

Gar sajda waakai hai dil au rooh ki paak awaaz, to uthaaiye paimaana aur kehiye "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Gar na lage ki is ibaadat gaah main khuda nahin, to ek sher ada kijiye aap bhi "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Sunday, August 21, 2011

रगों का रक्त

रगों का रक्त आखों में उतरता जा रहा है,
है लिए मशाल, सड़कों पे मचलता जा रहा है,

कभी ये आस के आधीन ख़्वाबों पे पड़ा था,
कभी ये पास के संगदिल गुनाहों से लड़ा था,
कभी ये लूट लाता हक किसी के स्वेद का था,
कभी ये डाल आता दो निवाला संवेद का था,
अभी ये कुछ अलग सा चिलचिलाता जा रहा है, 
मेरे रगों का रक्त आखों में उतरता जा रहा है,

किस्से, बातें हो रही बाज़ार में हर किस्म की है,
मेरा रूह मांगता कीमत मेरे जिस्म की है,
खौफ खौफ में भरा किनारे पे बेबाक सा है 
हौसला इस बार भगत सिंह और असफाक सा है
नसों में कुछ चिंगारी सा चटकता जा रहा है, 
मेरे रगों का रक्त आखों में उतरता जा रहा है,

इन्कुँलाब बुलंद हो कि ये केवल हसरत नहीं
जिंदाबाद का जलजला है ये कोई नफरत नहीं
ये बुलंदी मुत्तालिक इंसानियत के नाम से
हर कदम इस बार दिल से हर कदम ईमान से
उष्णता से जिस्म मेरा तमतमाता जा रहा है, 
मेरे रगों का रक्त आखों में उतरता जा रहा है 

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