Gujarish

Gar sajda waakai hai dil au rooh ki paak awaaz, to uthaaiye paimaana aur kehiye "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Gar na lage ki is ibaadat gaah main khuda nahin, to ek sher ada kijiye aap bhi "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Tuesday, October 11, 2011

जगजीता मेरे! रब जीता तूने,

जग जीता तूने!
रब जीता तूने!
देश और दुश्मन सब जीता तूने!

दरिया सूनी, सागर सूने;
पर्वत रोती, जंगल ढूंढें,
आशिक, बुद्जिल, शायर, कातिल,
सब हैं खलिश में, सब तुझे ढूँढें,
बस्ती, मस्जिद, मंदिर, महफ़िल,
मैखाने, दरगाहें और दिल,
धड़कन, आतिश, प्रेम और साजिश,
चाँद और तारे, सब जीता तूने,
जगजीता मेरे! सब जीता तूने,
जगजीता मेरे! जग जीता तूने,
जगजीता मेरे! रब जीता तूने,
जगजीता मेरे! सब जीता तूने!

(a tribute to my maestro Jagjit Singh. May your soul rest in peace)

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