Gujarish

Gar sajda waakai hai dil au rooh ki paak awaaz, to uthaaiye paimaana aur kehiye "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Gar na lage ki is ibaadat gaah main khuda nahin, to ek sher ada kijiye aap bhi "ai janaab" ... "IRSHAAD"

Friday, January 2, 2015

वल्लाह जबाब नहीं

ज़िन्दगी खाबों खिलोनो में गुजर जाए तो वल्लाह जबाब नहीं,
कश्ती बाखुदा किनारों पे ठहर आये तो वल्लाह जबाब नहीं,
फिरकापरस्ती शैतानी कवायत है, हैवानियत की इबादत है,
फिरकापरस्ती नामुरादों से मुकर जाए तो वल्लाह जबाब नहीं!

उनका दामन चाँद सितारों से भर जाए तो वल्लाह जबाब नहीं,
घर उनका एक हजारों में नजर आये तो वल्लाह जबाब नहीं,
बेवफाई रूह से गद्दारी है, अपने माजी से नाफ़रमानी है,
बेवफाई से पहले क़यामत का कहर आ जाए तो वल्लाह जबाब नहीं!

दस्तूर-ए-मैयत पे हमारी वो आ जाएँ तो वल्लाह जबाब नहीं,
दम निकलते वक्त वो एक जरा नजर आ जाएँ तो वल्लाह जबाब नहीं,
बद-अंज़ाम से बदतर कोई बदनसीबी नहीं, बदख्तर नहीं,
मुकद्दम बदनसीब को बददुआ वो देने आ जाएँ तो वल्लाह जबाब नहीं!

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